कवित्री मनीषा शिखर का आलेख
December 3, 2019 • योगेश गौड़

डॉक्टर  प्रियंका रेड्डी की मौत पर  छलका कवित्री  मनीषा शिखर का दर्द....

आज हर तरफ एक ही आवाज़ सुनाई दे रही है कि डॉ. प्रियंका रेड्डी के आरोपियों को मौत की सजा मिले...लेकिन क्या इतना कहने भर से समस्या का समाधान हो जाएगा ? नहीं जब तक कि न्याय प्रणाली में परिवर्तन नहीं होगा कोई न्याय नहीं होगा, कोई समाधान नहीं होगा...निर्भया के दोषियों को 7 वर्षों में भी सज़ा नहीं मिली...फाँसी की सज़ा मिलने के बाद भी फाँसी नहीं हुई तो प्रियंका को न्याय मिलेगा इस बात की क्या उम्मीद की जा सकती है....आज एक प्रियंका की इज्ज़त को तार-तार करके बेदर्दी से जिंदा जलाकर मौत के घाट उतार दिया गया...कल दूसरी कोई प्रियंका इस हैवानियत का शिकार होगी परसों कोई तीसरी....ऐसे में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे का क्या अर्थ बचता है....बेटियां कितनी भी शिक्षित और हुनरमंद क्यों न हों उन्हें आगे बढ़ने के लिए कोई और अलग दुनिया तो नहीं है ना...इस असुरक्षित समाज में वो क्या कर पाएंगी ? आज हर बेटी हर महिला में सिर्फ आक्रोश ही नहीं एक डर भी नज़र आ रहा है कि कहीं अगली प्रियंका वो न हो या फिर उसकी बहन न हो...मन से एक ही आवाज निकल रही है कि बेटी का भविष्य इस तरह तार-तार होकर मरना ही है तो उसे क्यों शिक्षा दे रहे हो क्यों उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी जाती है...क्या हमेशा डरे हुए और सहमे हुए रहना ही उसकी किस्मत है, या उसे सुरक्षित रहने के लिए घर में कैद होकर ही रहना होगा ? क्या उसका कोई अस्तित्व नहीं ? जब दोषियों की पहचान हो गयी तो उन्हें सज़ा देने में इतनी देर क्यूँ ?? यदि बलात्कार का जुर्म साबित होने के 24 घण्टे में फाँसी होने का कानून बन जाये तो जुर्म करने से पहले ही अपराधियों की रूह काँपेगी...जुर्म बढ़ने की वजह ही कानून की ढील है....और आख़िर में एक बात कहना चाहूँगी कि यदि कानून बेटियों के साथ इंसाफ नहीं कर सकता,उन्हें सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी नहीं ले सकता तो मेरे देश की बेटियाँ इतनी भी कमज़ोर नहीं हैं...जिस दिन वो झाँसी की रानी का रूप ले लें, तब कानून बीच में न आये...सुनो भारत की बेटियों अब तुम्हें इज्ज़त से जीना है तो झाँसी की रानी बनकर ही जीना होगा

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किसी के मैल हो मन में तो उसको साफ कर देना
मिले झुककर कोई तुझसे तो उसको माफ़ कर देना
मगर मिल जाये जो तुझको कोई वहशी दरिंदा तो
उठा तलवार हाथों में तू फिर इंसाफ़ कर देना

-कवयित्री मनीषा शिखर
संस्थापक  शिखर फाउंडेशन मोदीनगर (यू.पी)