वरिष्ठ कर अधिवक्ता अरुण राघव ने जीएसटी विवरणी दाखिल करने की अवधि को 6 माह बढ़ाए जाने के लिए की मांग
August 25, 2019 • अनवर खान

मोदीनगर (अनवर ख़ान)। अपने पत्रों के माध्यम ज़रिए वित्त मंत्रालय को जीएसटी की विसंगतियों से निरंतर अवगत करा रहे उत्तर प्रदेश कर अधिवक्ता संगठन के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य वरिष्ठ कर अधिवक्ता अरुण कुमार राघव ने वित्त मंत्री को पुनः एक पत्र प्रेषित कर जीएसटी विवरणी दाखिल करने की अवधि को 6 माह तक बढ़ाए जाने की मांग की है।
     पत्र में कहा गया है कि एक राष्ट्र एक कर की नीति पर काम करते हुए लागू की गई जीएसटी का संचालन सफल रूप से हो रहा है। परन्तु इसकी तकनीकी विसंगतियो तथा खराब पोर्टल व्यवस्था के चलते आए दिन होने वाले संशोधनों के कारण सम्पूर्ण भारत का कर अधिवक्ता तथा टैक्स प्रोफेशनल्स उच्च रक्तचाप व ह्रदय से सम्बंधित बिमारियो का शिकार हो रहे हैं। वर्तमान में वर्ष 2017-18 की जीएसटी वार्षिक विवरणी दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 जून 2019 थी, जिसको पोर्टल की विसंगतियो के कारण सरकार द्वारा बढाकर 31 अगस्त 2019 किया गया। किंतु कुछ बिंदुओं के चलते वार्षिक विवरणी समय पर दाखिल कर पाना असम्भव सा प्रतीत हो रहा है। पत्र में कारणों को स्पष्ट किया गया है कि जीएसटीआर 2ए व जीएसटीआर 3बी के मिसमैच को समाप्त कर पाना उक्त अवधी मे सम्भव नही है जिसके लिए वार्षिक विवरणी अर्थात जीएसटीआर 9 व 9सी के प्रारूप मे परिवर्तन होना आवश्यक है। सुझाव है कि वार्षिक विवरणी के प्रारूप मे एक लिंक इस आशय के साथ डाला जाए कि यदि व्यापारी का कोई खरीद का बिल 2ए मे दृष्टिगत नही हो रहा है तो उस बिल को व्यापारी स्वयं उक्त लिंक के माध्यम से वार्षिक विवरणी मे प्रविष्टि कर सके। जीएसटीआर 2ए व जीएसटीआर 1 मे प्रदर्शीत आंकड़ों का विभिन्न कारणो से सत्यापन नहीं हो पा रहा है, जिसको सत्यापित करने के लिए काफी समय की आवश्यकता है। जीएसटी की मासिक विवरणीयों में यदि कोई सप्लाई का बीजक भूलवश प्रविष्ट होना रह गया है तो उस पर देय अतिरिक्त कर जमा कराने की व्यवस्था तो वार्षिक विवरणी के वर्तमान प्रारूप में की गयी है परन्तु यदि कोई इनपुट सप्लाई अर्थात खरीद का बीजक मासिक विवरणियों मे रह गया तो ऐसे छूटे हुए बीजक पर आईटीसी को समायोजित करने की व्यवस्था उक्त प्रारूपों में नहीं है। ऐसे अनेको मामले दृष्टिगोचर हो रहे है जिनमे विक्रेता के जीएसटीआर 1 मे तो बिक्री का विवरण दिखाई दे रहा है परन्तु पोर्टल की त्रुटि के कारण क्रेता व्यापारी के जीएसटीआर 2ए मे प्रदर्शित नहीं हो रहा है, जिससे वार्षिक विवरणी मे मिसमैच आ रहा है। इसको दूरूस्त किया जाना अति आवश्यक है अन्यथा इसका खामियाजा देर सवेर क्रेता व्यापारी को विभागीय कार्यवाही के रूप मेे अवश्य झेलना पडेगा। वर्ष 2017-18 के जीएसटीआर 1 मे हुई त्रुटियो को संशोधित करने की समय सीमा 31 मार्च 2019 निर्धारित थी, जिसको वर्तमान मे भी वार्षिक विवरणी दाखिल करने तक जारी रखना अति आवश्यक है। वार्षिक विवरणी अर्थात जीएसटीआर 9, 9ए व 9सी के प्रारूप अत्यधिक जटिल व भ्रमपूर्ण है। यदि इनके भरने मे कोई त्रुटि हो जाती है तो उसके आवश्यक संशोधन की व्यवस्था उक्त प्रारूपो मे होनी चाहिए जो कि वर्तमान मे नही है। इसके अलावा आयकर विवरणी दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2019 है तथा कम्पोजीशन डीलर की प्रथम तिमाही की विवरणी भी 31 अगस्त 2019 तक दाखिल होनी है। कर निर्धारण वर्ष 2019-20 के टैक्स आडिट की तैयारी भी व्यापारी व कर अधिवक्ताओ को करनी पड रही है। सरकारी आकडो के अनुसार आज दिनांक तक पूरे भारत वर्ष मे मात्र 20 प्रतिशत वार्षिक विवरणियां दाखिल हो सकी है। पत्र के अंत में एडवोकेट अरुणा राघव द्वारा वर्ष 2017-18 की वार्षिक विवरणी की अंतिम तिथि कम से कम छः माह बढाने की मांग की गई है।